​Hanuman Chalisa in Hindi | Hanuman Chalisa Lyrics - M.R.D. COMMUNICATION TECHNOLOGY CENTRE

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Wednesday, June 17, 2026

​Hanuman Chalisa in Hindi | Hanuman Chalisa Lyrics

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श्री हनुमान चालीसा पूर्ण रूप में यहाँ दी गई है:


दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥


चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ १ ॥

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ २ ॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ ३ ॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥ ४ ॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ ५ ॥

संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बंदन॥ ६ ॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ ७ ॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ ८ ॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ ९ ॥

भीम रूप धरि असुर सँहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ १० ॥

लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ ११ ॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ १२ ॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ १३ ॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥ १५ ॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ १६ ॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥ १७ ॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ १८ ॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥ १९ ॥

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ २० ॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आग्या बिनु पैसारे॥ २१ ॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥ २२ ॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ २३ ॥

भूत पिसच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ २४ ॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ २५ ॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ २६ ॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ २७ ॥

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ २८ ॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ २९ ॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ ३० ॥

अष्ट सिधि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ ३१ ॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ ३२ ॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ ३३ ॥

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ ३४ ॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥ ३५ ॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ ३६ ॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ ३७ ॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ ३८ ॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिधि साखी गौरीसा॥ ३९ ॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥ ४० ॥


दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥


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